चंद्रशेखर वेंकट रामन्
अध्याय 4 - कक्षा 9
यह पाठ भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन और उनकी महान खोजों पर आधारित है। रामन् प्रभाव की खोज से लेकर वैज्ञानिक चेतना के प्रसार तक - उनकी संघर्षमय जीवन यात्रा हमें प्रेरणा देती है।
इस इंटरैक्टिव पाठ में हम जानेंगे कि कैसे एक जिज्ञासु छात्र ने समुद्र के नीले रंग के रहस्य को सुलझाया और भौतिक विज्ञान में क्रांति ला दी। हम देखेंगे कि कैसे रामन् ने कम साधनों में भी अपने शोधकार्य जारी रखे और भारत को वैज्ञानिक गौरव दिलाया।
लेखक धीरंजन मालवे द्वारा लिखित यह जीवनी न केवल रामन् के वैज्ञानिक योगदान को दर्शाती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व की उन विशेषताओं को भी उजागर करती है जो उन्हें एक महान व्यक्तित्व बनाती हैं।
धीरंजन मालवे का जन्म बिहार के नालंदा जिले के हुँसारावाँ गाँव में 9 मार्च 1952 को हुआ। ये एम.एससी. (सांख्यिकी), एम.बी.ए. और एल.एल.बी. हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े मालवे अभी भी वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुँचाने के काम में जुटे हुए हैं।
आकाशवाणी और बी.बी.सी. (लंदन) में कार्य करने के दौरान मालवे रेडियो विज्ञान पत्रिका 'ज्ञान-विज्ञान' का संपादन और प्रसारण करते रहे। मालवे की भाषा सीधी, सरल और वैज्ञानिक शब्दावली लिए हुए है।
मालवे ने कई भारतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखी हैं, जो इनकी पुस्तक 'विश्व-विख्यात भारतीय वैज्ञानिक' पुस्तक में समाहित हैं।
"विशाखापत्तनम्" का अर्थ है:
"अतिशयोक्ति" का अर्थ है:
"प्रतिभावान" का अर्थ है:
"निरूपयोगी" का विलोम है:
"अनुसंधान" का अर्थ है:
निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करें:
जिज्ञासा:
विश्वविख्यात:
प्रायोगिक:
निम्नलिखित में से कोई एक विषय चुनकर अपना विचार व्यक्त करें:
निम्नलिखित में से कोई एक परियोजना चुनें:
रामन् प्रभाव: जब एकवर्णीय प्रकाश की किरण किसी तरल या ठोस रवेदार पदार्थ से गुज़रती है तो उसके रंग में परिवर्तन आता है। यही रामन् प्रभाव है।
नोबेल पुरस्कार: रामन् को 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला। वे नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक थे।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1928 में रामन् प्रभाव की खोज हुई थी।
भारत रत्न: 1954 में रामन् को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।